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Saturday, 10 February 2018

जानिए वेदो तथा शास्त्रो में बताए गए भगवान् शिव के सभी नामो तथा उनके मंत्रो के बारे में

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 || ॐ नमः शिवाय ||


 




नमस्कार दोस्तों , एक बार फिर मै अपने नए पोस्ट के साथ हाज़िर हूँ | महाशिवरात्रि निकट है इसीलिए मेरे पोस्ट्स इसी से संबंधित है | आप मेरे पोस्ट्स को पढ़कर अपनी राय अवश्य दें | और यदि आप किसी अन्य विषय पर जानकारी जानकारी चाहते है तो कमेंट सेक्शन पर ज़रूर लिखे | 





दोस्तों , वैसे तो परमात्मा का न ही कोई रूप होता है ,और न ही नाम , न ही उसका जन्म होता है और न ही मृत्यु,| किन्तु , समय समय पर विभिन्न विभिन परिस्तिथियों पर वो जन्म लेते है और मानव स्वरूप धारण करते है और साथ ही विभिन्न विभिन्न घटनाओं के आधार पर गुणों के आधार पर स्वरुप और आकृति के आधार पर उन्हें नाम जाता है |



आज हम वेदो ,शास्त्रों,पुराणों ,धर्मग्रंथों के आधार पर भगवान् शिव के नामो के बारे में जानेंगे |  भगवान् शिव के नाम नीचे दिए गए है -


  • शिव - पवित्र,कल्याणकारी ,कल्याण स्वरूप शुद्ध | 
  • हर  -विनाशक ,पापो को हरने वाला 
  • रूद्र -भयानक ,भयावह 
  • अव्यक्त - इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले
  • अज – जन्म रहित,अजन्मा 
  • अनेकात्मा – अनेक आत्मा वाले
  • पूषदन्तभित् – पूषा के दांत उखाड़ने वाले
  • हरि – विष्णु समरूपी 
  • खण्डपरशु – टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
  • शुद्धविग्रह – दिव्यमूर्ति वाले
  • अष्टमूर्ति – आठ रूप वाले
  • देव – स्वयं प्रकाश रूप
  • पाशविमोचन – बंधन से छुड़ाने वाले
  • सात्त्विक- सत्व गुण वाले
  • शाश्वत – नित्य रहने वाले
  • सहस्रपाद - अनंत पैर वाले
  • परमेश्वर - प्रथम ईश्वर
  • अपवर्गप्रद - मोक्ष देने वाले
  • अव्यग्र – व्यथित न होने वाले
  • दक्षाध्वरहर – दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले
  • व्योमकेश – आकाश रूपी बाल वाले
  • जगद्व्यापी- जगत में व्याप्त होकर रहने वाले
  • सूक्ष्मतनु – सूक्ष्म शरीर वाले
  • मृत्युंजय – मृत्यु को जीतने वाले
  • प्रमथाधिप – प्रथम गणों के अधिपति
  • भगवान् – सर्वसमर्थ ऐश्वर्य संपन्न
  • हवि – आहुति रूपी द्रव्य वाले
  • ललाटाक्ष – माथे पर आंख धारण किए हुए
  • महाकाल – कालों के भी काल
  • कृपानिधि – करुणा की खान
  • भीम – भयंकर या रुद्र रूप वाले
  • परशुहस्त – हाथ में फरसा धारण करने वाले
  • मृगपाणी – हाथ में हिरण धारण करने वाले
  • जटाधर – जटा रखने वाले
  • कैलाशवासी – कैलाश पर निवास करने वाले 
  • कवची – कवच धारण करने वाले
  • कठोर – अत्यंत मजबूत देह वाले
  • त्रिपुरांतक – त्रिपुरासुर का विनाश करने वाले 
  • वृषांक – बैल-चिह्न की ध्वजा वाले
  • वृषभारूढ़ – बैल पर सवार होने वाले
  • भस्मोद्धूलितविग्रह – भस्म लगाने वाले
  • सामप्रिय – सामगान से प्रेम करने वाले
  • स्वरमयी – सातों स्वरों में निवास करने वाले
  • त्रयीमूर्ति – वेद रूपी विग्रह करने वाले
  • अनीश्वर – जो स्वयं ही सबके स्वामी है
  • सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले
  • परमात्मा – सब आत्माओं में सर्वोच्च

  • वृषवाहन  -जिसकी सवारी वृष/बैल  हो 
  • सोमसूर्याग्निलोचन – चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आंख वाले
  • आशुतोष -शीघ्र इच्छा पूरी करने वाले 
  • यज्ञमय – यज्ञ स्वरूप वाले

  • सोम – उमा के सहित रूप वाले
  • पंचवक्त्र – पांच मुख वाले
  • सदाशिव – नित्य कल्याण रूप वाले
  • विश्वेश्वर- विश्व के ईश्वर
  • वीरभद्र – वीर तथा शांत स्वरूप वाले
  • गणनाथ – गणों के स्वामी
  • प्रजापति – प्रजा का पालन- पोषण करने वाले
  • हिरण्यरेता – स्वर्ण तेज वाले
  • दुर्धुर्ष – किसी से न हारने वाले
  • गिरीश – पर्वतों के स्वामी
  • गिरिश्वर – कैलाश पर्वत पर रहने वाले
  • अनघ – पापरहित या पुण्य आत्मा
  • भुजंगभूषण – सांपों व नागों के आभूषण धारण करने वाले
  • भर्ग – पापों का नाश करने वाले
  • गिरिधन्वा – मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले
  • गिरिप्रिय – पर्वत को प्रेम करने वाले
  • कृत्तिवासा – गजचर्म पहनने वाले
  • पुराराति – पुरों का नाश करने वाले

  • अक्षयगुण -गुणों के भंडार ,गुणों के स्वामी,असीमित गुणों 
  • जगद्गुरू – जगत के गुरु
  • महासेनजनक – कार्तिकेय के पिता
  • चारुविक्रम – सुन्दर पराक्रम वाले
  • अनघ -दोष रहित
  • अनंतदृष्टि -अनंत वाले,अनंत तक देखने वाले

  • औगढ़ -हर समय आनंद में रहने वाला
  • रूद्र – उग्र रूप वाले
  • भूतपति – भूतप्रेत व पंचभूतों के स्वामी
  • स्थाणु – स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले
  • अहिर्बुध्न्य – कुण्डलिनी- धारण करने वाले
  • दिगम्बर – नग्न, आकाश रूपी वस्त्र वाले
  • अष्टमूर्ति – आठ रूप वाले
  • भूतेश्वर -भूतो और असरो के भी स्वामी 
  • भूदेव  -पृथ्वी के देवता ,पृथ्वीपति ,भूमिपति 
  • कमलाक्षं  -कमल जैसे नयनो वाले  


  • पाशविमोचन – बंधन से छुड़ाने वाले
  • मृड – सुखस्वरूप वाले
  • पशुपति – पशुओं के स्वामी
  • देव – स्वयं प्रकाश रूप
  • महादेव – देवों के देव
  • अव्यय – खर्च होने पर भी न घटने वाले
  • हरि – विष्णु समरूपी

  • हर – पापों को हरने वाले
  • भगनेत्रभिद् - भग देवता की आंख फोड़ने वाले
  • हस्राक्ष - अनंत आँख वाले
  • अनंत - देशकाल वस्तु रूपी परिच्छेद से रहित
  • तारक - तारने वाले
  • परमेश्वर - प्रथम ईश्वर

  • महेश्वर – माया के अधीश्वर
  • शम्भू – आनंद स्वरूप वाले
  • पिनाकी – पिनाक धनुष धारण करने वाले
  • शशिशेखर – चंद्रमा धारण करने वाले
  • वामदेव – अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
  • विरूपाक्ष – विचित्र अथवा तीन आंख वाले 
  • कपर्दी – जटा धारण करने वाले
  • नीललोहित – नीले और लाल रंग वाले
  • शंकर – सबका कल्याण करने वाले
  • शूलपाणी – हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
  • खटवांगी- खटिया का एक पाया रखने वाले
  • विष्णुवल्लभ – भगवान विष्णु के अति प्रिय
  • शिपिविष्ट – सितुहा में प्रवेश करने वाले
  • अंबिकानाथ- देवी भगवती के पति
  • श्रीकण्ठ – सुंदर कण्ठ वाले
  • भक्तवत्सल – भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले
  • भव – संसार के रूप में प्रकट होने वाले
  • शर्व – कष्टों को नष्ट करने वाले
  • त्रिलोकेश- तीनों लोकों के स्वामी
  • शितिकण्ठ – सफेद कण्ठ वाले
  • शिवाप्रिय – पार्वती के प्रिय
  • पशुपति  -सभी जीवो का स्वामी
  • उग्र – अत्यंत उग्र रूप वाले

  • भैरव -विनाशक,विनाश के देवता 
  • कपाली – कपाल धारण करने वाले
  • कामारी – कामदेव के शत्रु, अंधकार को हरने वाले
  • सुरसूदन – अंधक दैत्य को मारने वाले
  • अव्ययप्रभु -कभी न खर्च होने वाले देवता /ईश्वर/परमेश्वर
  • महाशक्तिमय -परमशक्तिशाली असीमित शक्तिओ का स्वामी 
  • भोलेनाथ-उदार हृदय वाले/कृपालु 

  • गंगाधर – गंगा को जटाओं में धारण करने वाले
  • पानिधि – करुणा की खान
  • द्युतिधर -बुद्धि के पति/स्वामी
  • श्रुतिप्रकाश -वेदो  में प्रकाश/ज्ञान भरने वाले 
  • भालनेत्र  -माथे पर नेत्र धारण करने वाले













: शिव के नाम :

 ध्यानचंद्र    ध्यानेंय ,जिसका ध्यान किया जाता है 

 अपरिच्छेद्य   अबोध्य ,अकथनीय ,जिसका वर्णन न किया जा सके 

गौरीभर्तृ   गौरी पति 

नीललोहित नीले रक्त वाले 

भूतपाल भूतो से रक्षा करने वाले 

चंद्रपाल  चंद्र्मा के स्वामी/अधिपति 

चंद्रप्रकाश  चन्द्रमाके प्रकाश  को जिसने शिखर पर रखा है 

दयालु  करुणामय ,करूणानिधि ,कृपा करने वाले 

देवादिदेव देवताओ के भी देवता ,महादेव 

धनादीप धनो के स्वामी

ध्यानदीप ध्यान और एकाग्रता के प्रतीक 

विश्वमूर्ते जिसका शरीर पूरा ब्रह्माण्ड है 

दुर्जनीय जिसे जानना कठिन है 

दुर्जय जिससे जीता न जा सके ,अजेय 

गंगाधत्रिवर्गा र  गंगा को धारण  करने वाले ,जटाधर 

गिरजापति गिरिजा पति /स्वामी 

गुनग्राहिन गुणों के स्वामी  

गुरुदेव सभी के गुरु 

हर पापो का नाश करने वाले 

जगदीश ब्रह्माण्ड के रचियिता /राजा/अधिपति 

जराधिशमन विपत्तियों से उद्धार  करने वाले 

जतिन जटा धारण करने वाले ,जटाधारी 

कैलास शांति  प्रदान करने वाले 

कैलाशधिपति कैलाश के अधिपति/राजा  

कैलाशनाथ  कैलाश पर्वत के स्वामी 

त्रिवर्गा   पुण्य,यश,धन,प्रेम के दाता 

कंठा  हमेशा दीप्तिमान रहने वाले 

कपालिन मुंडो की माला पहनने वाले 

खट्वांगीण खट्वांगीण शस्त्र धारण करने वाले 

कुण्डलिन  कुण्डल धारण करने वलए 

ललाटाक्ष जिसके ललाट/भृकुटि/माथे पर नेत्र है 

लिंगाध्यक्ष लिंगो का अध्यक्ष 

लिंगराज  लिंगो का राजा 

लोकांकर  तीनो लोको  निर्माता/जन्मदाता 

लोकपाल  ब्रह्माण्ड/विश्व की रक्षा कने वाला 

महाबुद्धि जिसकी बुद्धि अनंत है  

महादेव  देवो के देव 

महाकाल कालो का काल ,सभी कालो का स्वामी 

महामाया माया जिसके अधीन हो 

महामृत्युंजय  मृत्यु जिसके अधीन है,मृत्यु को जीतने वाला 

महानिधि  गुणों का स्वामी,

सरगसाधना  सृजनकर्ता 

महायोगी  योगियों में सर्वश्रेष्ठ 

महेश परमेश्वर ,परमात्मा ,महा ईश्वर 

महेश्वर देवताओ का पति   

नागभूषण  आभूषण /अलंकार  वाला 

नटराज  नृत्यकला का राजा , 

नीलकंठ नीले कंठ/गले वाला 

नित्यसुंदर  हमेशा सुन्दर लगने वाला 

नृत्यप्रिय  नृत्य प्रेमी ,जिसे नृत्य अति प्रिय है 

ओमकार ओंकार  ॐ जिसमे है 

पालनहार सभी का पालन/रक्षा करने वाला 

परमेश्वर  देवो में सर्वप्रर्थम 

परमज्योति  महान वैभव वाला ,महान तेज/ज्योति वाला 

वामदेव  प्रिय ईश्वर ,सुन्दर भगवान् 

पिनाकिन  पिनाक नामक धनुष धारण करने वाला ,जिसके हाथ में पिनाक है 

प्रणव  ॐ की उत्पत्ति करने  वाला 

प्रियभक्ता  भक्तो का प्रिय 

प्रियदर्शन  प्रियदृष्टि वाला 

पुष्कर पालनहार,पोषण करने वाला 

पुष्पलोचन पुष्प जैसे नैनों वाला 

रविलोचन  सूर्य जैसी आंखो  वाला 

रूद्र  भयावह 

रुद्राक्ष जैसी आँखे रूद्र जैसी है 

सदाशिव शास्वत ईश्वर/परमात्मा 

सनातन  शाश्वत ईश्वर ,हमेशा रहने वाला 

सर्वाचार्य सभी विद्याओ का गुरु/आचार्य 

सर्वशिव  सबसे पवित्र 

सर्वतपान  सबसे तेजस्वी 

सर्वयोनि  प्रत्येक वस्तु/अस्तित्व ,बिना अस्तित्व  सभी का स्रोत  

सर्वेश्वर देवताओ के स्वामी 

शम्भू  जो खुशियों का घर है ,खुशियों से भरा ,ख़ुशी का आलय /निवास 

शंकर ख़ुशी वाला 

शिवा जो पूरी तरह  शुद्ध  है 

शूलिन  जिसके पास त्रिशूल है 

श्रीकंठ तेजस्वी गर्दन वाला  

 पातु कुशल 

शुद्धविग्रह जिनके पास शुद्ध शरीर है 

स्कन्दगुरु स्कंद के उपदेशक 

सोमेश्वर देवताओ के देवता 

सुखद  सुख देने वाला ,सुखकर्ता 

सुप्रीता हमेसा प्रसन्न  रहने वाला  

सुरगणा  जिसके अनुचर देवता है  

सुरेश्वर  सभी देवताओ के देवता  

स्वयंभू स्व-अवतरित ,स्व-प्रकट  

तेजस्वनि  प्रकाश फैलाने वाला 

त्रिलोचन  तीन नेत्रों वाला  

त्रिलोकपति तीनो लोको इ स्वामी 

त्रिपुरारी  त्रिपुरा /असुर  के शत्रु 

त्रिशूलिन त्रिशूल  धारण करने वाला 

उमापति  उमा/पार्वती  के पति 

वाचस्पति  वाणी के ईश्ववर  

वज्रहस्त वज्र जैसे हाथो वाला 

वरदा वरदान देने वाला  

वेदकर्ता  वेदो के प्रवर्तक 

वीरभद्र  नीचे के विश्व के ईश्वर 

विशालाक्ष  विशाल नेत्रों वाला,बड़ी-चौंडी आँख वाला  

विश्वेश्वर विश्व के ईश्वर ,ब्रम्हांड के ईश्वर  

सङ्कर महान आचारण  वाले 




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