Ordered List

Friday, 9 February 2018

जानिए महादेव और महाशिवरात्रि से जुड़े कुछ रोचक तथ्य ॐॐॐ

No comments

||ॐ नमः शिवाय||

महाकाल 


नमस्कार  दोस्तों , भारत  को त्योहारों  का देश माना  जाता  है |  क्योकि  यहाँ  हर वर्ष  निरंतर थोड़े से  समय  अंतराल  मैं  कोई  न कोई  त्योहार  मनाया  जाता  है | उन्ही  त्योहारों  में से  एक है  महाशिवरात्रि  जिसे  पुरे भारत में धूमधाम  से मनाया  जाता है | ये हिन्दुओ का प्रमुख त्योहार है |  अब  कुछ ही दिनों में महाशिवरात्रि आने वाली है |  जैसा की आप सभी  भलीभांति  जानते होंगे कि इस वर्ष महाशिवरात्रि  १४ /14 फरवरी को है | हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रतिवर्ष फाल्गुन माह  के कृष्ण  चतुर्दशी को अर्थात अमावस्या के एक दिन पहले वाली रात को महाशिवरात्रि बनायीं  जाती है
| 



महाशिवरात्रि  भगवान् शंकर  का त्योहार है |  भगवान् शंकर  त्रिदेवो में से एक है | त्रिदेवो में ब्रह्मा, विष्णु  और महेश / शंकर  है |  भगवान् शंकर को कभी  संहारक  तो कभी सृस्टि  के  पालक  के रूप  में  कल्पना  की जाती है | 

  • ऐसा माना जाता है  कि सृष्टि  के प्रारंभ में  इसी  दिन  मध्यरात्रि  को  भगवान शिव् का प्राकट्य  प्रजापिता  ब्रह्मा  के शरीर  से हुआ था |  और ऐसा  भी माना जाता है , कि  इसी  दिन भगवान शंकर तांडव नृत्य करते हुए इस सृष्टि का  अंत अपनी त्रिनेत्रो की जवाला से कर देंगे और साथ ही  कुछ  स्थांनो पर ऐसा कहा जाता है कि  इसी दिन भगवान शंकर  का विवाह माता पार्वती से हुआ था , कई अलग अलग दृस्टिकोण  से महाशिवरात्रि और भी महत्वपूर्ण  हो जाती है | 

    भगवान् शंकर को और भी कई नामो से जाना जाता है जिनमे से कुछ है- महादेव ,नीलकंठ,करुणावतार ,शंभु ,भोलेनाथ ,शंकर ,शिव आदि |
  • हिन्दू धर्म में  जहाँ सभी देवी देवताओ को  स्वर्ण मुकुट और अलंकृत वेशभूषा के साथ देखा जाता है  वंही भगवान् शिव ही एक मात्र ऐसे है जो चिता भस्म ,नागो की माला , बाघाम्बर ,मृग चर्म,बिच्छू ,रुद्राक्ष जैसे आभूषण धारण करते है | 


भगवान शिव को ज्योतिष शास्त्र ,वारो /दिनों ,आदि कई सारी विद्याओ का रचयिता  माना जाता है| भगवान  शिव् की आराधना पूजा शिवलिंगो और मूर्ति रूप दोनों में की जाती है  



     

       ॐ हौं जूं सः भूभुर्वः स्वः,,

ॐ त्र्यम्बकं स्यजा महे सुग्न्धिम्पुष्टि -

  वर्ध्दनं | उवार्वरुक्मि  बन्धनान मृत्योम्मुक्षि- 

यमाम्र्तात् ||  ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ





    भगवान् शिव् के प्रमुख शस्त्र पिनाक धनुष ,पाशुपतास्त्र ,डमरू व् त्रिसूल है | शिव् का अर्थ कल्याण        करने वाला होता है  किन्तु  भगवान् शिव् को संहार का देवता बताया गया है वे लय एवं प्रलय दोनों      अपने अधीन है  वे सृष्टिकर्ता  और  संहारक भी है त्रिदेवो में उनका कार्य सृष्टि के संहार का बताया गया    है | 

    वेदो में उनका नाम रूद्र  कहा गया है  वे व्यक्ति के अंतर्चेतना में है,उनकी शक्ति/अर्धांगिनी  माता पार्वती हैँ  और पुत्र श्री गणेश और कुमार कार्तिकेय है और पुत्री अशोककुमारी /अशोकसुन्दरी  है|  सृष्टि की उत्पत्ति  , स्थिति  और अंत के अधिपति  है |

    भगवान् शिव को  उनकी सौम्य प्रकृति के साथ साथ उनके रौद्र /क्रोधी  स्वरूप के लिए भी जाना जाता है  उनका मूल बीज मंत्र ॐ नमः शिवाय  | भगवान् शिव के मस्तक पर चन्द्रमा शोभा पाते है  वे आशुतोष है ,गृहस्थ होते हुए भी महायोगी है ,कालो के काल है,शमशान उनकी भूमि है वे परमवैरागी है, उनके परिवार में भूत -प्रेत गण ,नंदी,सर्प ,मूषक ,मयूर सभी समभाव से रहते है वे प्रकृति के संतुलन को दर्शाते है| 
पूजन 
भगवान् शिव की  पूजा बिल्वपत्र ,धतूरे के पुष्प ,भांग  का प्रसाद ,समी की पत्ती से की जाती है और इनका अभिषेक  जल तथा पंचामृत दूध ,दही ,शहद,घी ,शक्कर  इस पांच अमृत से की जाती है उसके पश्चात  उन्हें जनेऊ पहनाकर प्रसाद  चढ़ाकर आरती की जाती है ,रात्रि के चारो प्रहरों में इनकी पूजा की जा सकती है भगवान् शंकर के त्रिसूल तथा डमरू मंगल तथा गुरु से आबद्ध है | महा शिवरात्रि तथा सावन का महीना इनको बहुत ही प्रिय है तथा ये बहुत ही करुणा के देव है इनकी पूजा श्रद्धा से करने पर जल्दी ही इनकी कृपा प्राप्त होटी है |  भगवान्  शिव् का चित्रण कभी परम योगी,तो  कभी रौद्र रूप में द्ख गया है,तंत्र में उन्हें भैरव की संज्ञा दी गयी है |


so friends,

comment section me zaroor bataiyega ki aap sb ko mera post kaisa laga
           aur sath hi apna feedback zarror diiyega ........ 
 





No comments :

Post a Comment