29 अप्रैल 2020 को बॉलीवुड और हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता इरफ़ान खान की मृत्यु 53 वर्ष की उम्र में हो गयी, देश की बड़ी -बड़ी हस्तियों के साथ हमारे पूरे देश ने इसका शोक मनाया | कई लोग तो उनसे मिले भी नही होंगे लेकिन वे भी आज उनकी मौत सुनकर दुखी है | वे एक जबरदस्त अभिनेता के साथ -साथ बड़े ही प्रभावशाली व्यक्तित्व के थे | सिनेमा जगत को निश्चित ही कभी ऐसा अभिनेता मिले, इसकी क्षति पूर्ति कभी नही हो सकती | ये एक ऐसे अभिनेता थे जो स्टारडम से परे थे, अपनी बातो को बेबाकी से रखते थे, विवादों से परे अपनी बातो को बेबाकी और स्पष्टता से कहते थे पठान परिवार में जन्म लेने के बाद भी इरफ़ान शाकाहारी थे उनके पिता उन्हें पठान परिवार में जन्म लिया ब्राह्मण कहते थे | इरफ़ान का जन्म 7 जनवरी 1968 को जयपुर में हुआ | इनके पिता ने इनका नाम साह्जादे इरफ़ान अली खान रखा , लेकिन बाद में इन्होने अपने नाम को कर दिया, और उन्होंने बाद में अपने नाम में एक R और जोड़ा वो अपना नाम 'Irrfan' लिखते थे | उनका मानना था उनकी पहचान उनके धर्मं, मजहब से नही उनके अभिनय उनके काम से पहचाने जाना चाहते थे | कहते है सिनेमा जगत में तीन खान है लेकिन अभिनय की सबसे बड़ी खान कोई है तो है - Irrfan Khan.
4 दिन पहले 25 अप्रैल को ही इनकी माँ का भी निधन जयपुर में हो गया, वो लॉक डाउन के कारण अपनी माँ के अंतिम दर्शन नहीं कर सके | इरफ़ान को न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर था, इस बीमारी का पता उन्हें 2018 में चला | इसके इलाज के लिए वो लन्दन भी गये थे | वे लम्बे वक्त से कैंसर की लड़ाई लड़ रहे थे लेकिन वो इस लड़ाई को जीत नही सके | जब भी कभी अभिनय की बात की जाएगी तो इरफ़ान को निश्चित ही याद किया जायेगा | मरते वक़्त उनके शब्द थे - “अम्मी मुझे लेने आई है “ |
इरफ़ान अभिनय से पहले अपना करियर क्रिकेट में बनाना चाहते थे , लेकिन पैसो की वजह से वो क्रिकेट में अपना करियर नही बना सके | कॉलेज में नाटको से प्रभावित होकर उन्होंने अभिनय करने का निश्चय किया |ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह जैसे - दिग्गज अभिनेताओ से प्रेरित होकर National School of Drama, दिल्ली मे अभिनय सीखा |
सच कहूं तो इरफ़ान मेरे सबसे पसंदीदा अभिनेता नही है लेकिन उनकी अभिनय कला का मैं बहुत ही बड़ा प्रसंशक हूँ, उनकी अभिनय कला का लोहा बॉलीवुड ही नही बल्कि हॉलीवुड भी मानता है | उन्होंने जिन भी फिल्मो में काम किया, जिस भी किरदार का अभिनय किया उसे जीवंत कर दिया, उस किरदार को जिया है | अगर आप उनकी फिल्मो का चुनाव देखेंगे तो आप भी समझ जायेंगे की उनकी फिल्मे वास्तविक जीवन का जीवंत चित्रण है उनकी फिल्मो में एक वास्तविकता दिखाई पड़ती है, उनकी फिल्मो की कहानी हमें हमारी कहानी लगती है न की कोई कल्पना | इरफ़ान की किसी भी फिल्म को देख कर आप उनके अभिनय कला की परिपक्वता और वास्तविकता देख सकते है | आप उनके किसी भी किरदार को देख कर आप उनकी कहानी में खो जायेंगे, उनकी आँखों से ही उनकी अभिनय कला दिखाई पड़ती थी , उनके द्वारा कहे जाने वाले एक - एक डायलाग को सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे | फिल्म समीक्षकों, समकालीनों और अन्य विशेषज्ञों ने उनके बहुमुखी और प्राकृतिक अभिनय के लिए उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक माना है।
TV Serials
90 के दशक
में, इरफ़ान ने - भारत एक खोज, बनेगी
अपनी बात, चाणक्य, चंद्रकांता, श्री कांत जैसे दूरदर्शन टीवी सीरियल में भी काम किया | उन्होंने अकादमी पुरस्कार नामांकित फिल्म सलाम बॉम्बे के साथ अपनी शुरुआत कीऔर उनकी अंतिम फिल्म अंग्रेजी मीडियम थी, उनकी पहली फिल्म सलाम बॉम्बे को ऑस्कर अवार्ड्स के लिए भी नामांकित किया गया |
Films
यदि आपने उनकी फिल्मे और उनका अभिनय नही देखा है तो ये कुछ प्रमुख फिल्मे है - Slumdog Millionaire, Life of Pie, Paan Singh Tomar, Life In A Metro, Blackmail, Hindi Medium , Lunch Box, Angrezi Medium , Billu, Madari, Jurassic World, Inferno, Karwaan, Talwar, Piku, D-Day, New York, Right Yaaa Wrong, The Amazing Spider-Man, Saheb Biwi Aur Gangster Returns, Saat Khoon Maaf, Mumbai Meri Jaan, The Killer Maqbool, Haider इत्यादि | जिन्हें आपको एक बार जरूर देखना चाहिए आपको इनकी अदायगी के प्रसंशक बन जायेंगे |
Awards
इरफ़ान ने कई पुरस्कार जीते -
राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, फिल्म्
फेयर के अवार्ड्स | इन्होने २ ऑस्कर विजेता फिल्मो में
काम किया है – सलाम बॉम्बे , स्लम डॉग मिलियनिर | सिनेमा जगत में उनके योगदान और अभिनय के लिए कई
पुरस्कार भी मिले जिनमे कुछ प्रमुख है -
2011 में, कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत के चौथे सर्वोच्च
नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
2011 में, पान सिंह तोमर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म
पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ
अभिनेता के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड से सम्मानित किया।
हिंदी मीडियम (2017) में इन्हें इनके भीने के लिए अंतर्राष्ट्रीय
भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार मिला |
Videos
श्रद्धांजलि
मृत्यु तो अंतिम सत्य है, जिसे बदला नही जा सकता | आइये हम सभी ईश्वर से प्रार्थना करते है की भगवान उनकी आत्मा को शान्ति
प्रदान करे और उनके परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दे
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